तेरे परा नाल उड जाँदे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे परा नाल उड जाँदे माँ,

नी नहीते सानू कौन जाणदा, कौन जाणदा, कौन जाणदा

तेरे परा नाल उड जाँदे माँ, ...

उंगली जै फढी मेरी रस्ते मेनू मिल गये.

बंजर जमीन विच्च फूल दाती खिल गये.

जद दी तु मेरी ते मै दाती तेरा हो गया.

दुनीया दा हर सुख दाती मेरा हो गया.

तुसा फढ लाई डिग्गदे दी बाँ.

हो, नहीते सानू कौन जाणदा, कौन जाणदा, कौन जाणदा

तेरे परा नाल उड जाँदे माँ,...

होके मैं दीवाना तेरी महिमा जे गान्दा ना,

मैंवि ते बेनाम हुंदा नाम कित्ये पान्दा ना,

माँ-माँ कह के जद वि पुकारया

तुस्सी वि माँ बेटा कह के मेनू हे दुलारया,

तुसाँ दित्ती मेनू ममता दी छा थाँ

हो, नहीते सानू कौन जाणदा,कौन जाणदा ,कौन जाणदा

तेरे परा नाल उड जाँदे माँ,...

नैना च बसाया जद तेनू नैनादेवी माँ,

अँख दा तु तारा जाणे मेनू शेरांवाली माँ,

प्यार तेनू कर प्यार सबणा तो पा लया,

मैं तेनू अपनाया जग मेनू अपना लया,

तुसाँ कदी वि न कित्ती मेनू ना,

हो, नहीते सानू कौन जाणदा, कौन जाणदा, कौन जाणदा,

तेरे परा नाल उड जाँदे माँ, ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।