सोहणा दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोहणा सजा है तेरा द्वारा,

गूंज रहा तेरा जयकारा,

हो रही जय जयकार,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

और किसे मैं अपने,

आंसू दिखाऊं,

और किसे मैं अपने,

आंसू दिखाऊं,

किसको अपने,

मन का दर्द दिखाऊं,

मतलब का है संसार,

मां शेरां वाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

दिल से जहां भी,

जिसने तुझको पुकारा,

दिल से जहां भी,

जिसने तुझको पुकारा,

तूने दिया है मैया,

सबको सहारा,

नैया है मेरी मझदार,

मां शेरावाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

भक्ति ना जानू मैं तो,

पूजा ना जानू,

भक्ति ना जानू मैं तो,

पूजा ना जानू,

तेरे सिवा मैं कोई,

दूजा ना जानू,

सांचा है तेरा दरबार,

मां शेरावाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

तेरी शरण में आया,

झोली पसारे,

तेरी शरण में आया,

झोली पसारे,

खाली ना जाऊंगा मैं,

दर से तुम्हारे,

तुम हो दया का भंडार,

मां शेरावाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा,

सोहणा सजा है दरबार,

मां शेरां वाली तेरा मां,

भक्तों की सुन लो पुकार,

मां शेरां वाली जगदम्बा………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।