बनके दुल्हनिया श्याम नाम की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम नाम की मेहंदी रचाकर,

घूँघट में शर्माउंगी,

बनके दुल्हनिया श्याम पिया की,

ब्रज नगरी अब जाउंगी,

ब्रज नगरी अब जाउंगी……..

श्याम नाम की मांग भरी और,

श्याम चुनरिया ओढ़ी रे,

श्याम प्रीत रंग राची ऐसी,

दुनिया से मुख मोड़ी रे,

वो मेरा हो जायेगा और,

मैं उसकी हो जाउंगी,

बनके दुल्हनिया श्याम पिया की,

ब्रज नगरी अब जाउंगी,

ब्रज नगरी अब जाउंगी…….

गईया चराने वो जायेंगे,

मैं उनके संग जाउंगी,

श्याम बजायेंगे बंशी,

और मैं नाचूंगी गाउंगी,

थक जायेंगे श्याम पिया तो,

थक जायेंगे श्याम पिया तो,

उनके चरण दबाऊँगी,

बनके दुल्हनिया श्याम पिया की,

ब्रज नगरी अब जाउंगी,

ब्रज नगरी अब जाउंगी….

सूरज रंग चढ़ा मेहंदी का,

मैं तो ऐसी लाल भई,

श्याम पिया की बनके सुहागन,

सातो जनम निहाल हुई,

सदा सुहागन कहलाउंगी,

सदा सुहागन कहलाउंगी,

जीवन सफल बनाउंगी,

बनके दुल्हनिया श्याम पिया की,

ब्रज नगरी अब जाउंगी,

ब्रज नगरी अब जाउंगी……….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।