अब तू ही सहारा भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

रूठ गई है किस्मत ये मेरी रूठा जग सारा,

अब तू ही सहारा भोले तू ही सहारा………

कालों के काल महाकाल तेरा घर तो है कैलाश,

तेरे दर पर आया हूं मैं कुछ भी नहीं है मेरे पास,

अपना दुख मैं कितना सुनाओ किस्मत ने हैं मारा,

अब तू ही सहारा भोले तू ही सहारा…….

चढ़ता है तुझको भांग धतूरा मिश्री मलाई न भाता है,

तेरी जटा से निकली गंगा गंगाधर कहलाता है,

तेरे नाम से दुख हट जाता दे दे साथ हमारा,

अब तू ही सहारा भोले तू ही सहारा……..

मैं हूं तेरा बाल पुजारी तुम मेरे तू स्वामी हो,

गलती माफ करना मैं तो एक कल गामी हूं,

अब मान भी जाओ मेरे भगवन कर दो वारा न्यारा,

अब तू ही सहारा भोले तू ही सहारा………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।