गोरे तन पर भस्म रमाये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर,

गोरे तन पर भस्म रमाये,

सर्पमाल लटकाये भोले भंडारी,

ओ भोले भंडारी,

भोले भंडारी,

ओ भोले भंडारी,

गोरे तन पर भस्म रमाये,

सर्पमाल लटकाये भोले भंडारी,

ओ भोले भंडारी,

भोले भंडारी,

भोले भंडारी,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर.....

जटा मुकुट में गंग समाये,

चंदा तिलक सजाये,

शम्भू त्रिपुरारी हो भोले भंडारी,

शम्भू त्रिपुरारी हो भोले भंडारी,

जटा मुकुट में गंग समाये,

चंदा तिलक सजाये,

भोले भंडारी हो भोले भंडारी,

भोले भंडारी हो भोले भंडारी,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर......

सहज भयंकर विष पी जाये,

दुनिया महिमा गाये,

हे डमरुधारी हो भोले भंडारी,

हे डमरुधारी हो भोले भंडारी,

सहज भयंकर विष पी जाये,

दुनिया महिमा गाये,

भोले भंडारी हो भोले भंडारी,

भोले भंडारी ओ भोले भंडारी,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर,

जय शिव शंकर हो हो जय त्रिशूलधर,

हो हो जय शिव शंकर हो हो नमामि हर हर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।