मैया ऐसा दो वरदान

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं,

मेरे पुरे करो अरमान सदा मैं सुहागन रहूं,

मैं करती रहूँ तेरा ध्यान सदा मैं सुहागन रहूं…...

होटो पे लगी रही लाल लाल लाली,

लाल लाल लाली मैया लाल लाल लाली,

सिंदूर भरी रहे मांग सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

माथे का टिका मैया मोतियों सा चमके,

मोतियों सा चमके चम चम चमके,

बिंदिया भी लगी रहे लाल सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

हाथ की चूड़ी मैया खन खन खनके,

खन खन खनके खन खन खनके,

मेहँदी भी रची रहे लाल सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

पाँव की पायल मैया छन छन बोले,

छन छन बोले मैया छन छन छन छन बोले,

महावर भी लगा रहे लाल लाल सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

सिर की चुनरिया सितारों सी चमके,

सितारों सी चमके सितारों सी चमके,

गोदी में खेले नन्द लाल सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

भवन में घंटा मैया घन घन बाजे,

घन घन बाजे मैया घन घन बाजे,

तेरी ध्वजा लहराए मैया लाल सदा मैं सुहागन रहूं,

मैया ऐसा दो वरदान सदा मैं सुहागन रहूं……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।