बाँधी तुम संग प्रीत की डोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छवि देख हुई मैं भाव विभोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर.....

नयनाभिराम तुम्हारी सूरत,

दिल में बस गई प्यारी मूरत,

प्रियतम तुम मेरे चित्त चोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर.....

सुख सपनों में खो मैं जाऊँ,

आँखें खोलूँ तो तुमको ही पाऊँ,

अल्हड़ शाम तुम ही मेरी भोर ,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर......

मोहनी छवि तुम्हारी मनभावन,

तुम हो मेरी प्रीत का सावन,

देख तुम्हें नाचे मन का मोर ,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर.....

तुम बिन मैं क्या क्या मेरी हस्ती,

मेरी दुनिया तुम्हारे नैनों में बस्ती,

खिंची चली आई तुम्हारी ओर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

बाँधी तुम संग प्रीत की डोर,

छवि देख हुई मैं भाव विभोर....

© राजीव त्यागी najafgarh

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।