तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी पे रीझे श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने भोले के अंगना,

पार्वती तोड़न ना देवे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने गणपत के अंगना,

रिद्धि सिद्धि तोड़न ना देवे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने विष्णु जी के अंगना,

लक्ष्मी जी तोड़न ना देवे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने रामा के अंगना,

सीता जी तोड़न ना देवे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने ब्रह्मा जी के अंगना,

ब्रह्माणी तोड़न ना देवे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

तुलसी को देखा मैंने भक्तों के अंगना,

सखियां भोग लगाए रे, श्याम तुलसी पर मचले,

तुलसी कहां से लाऊं रे श्याम तुलसी पर मचले......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।