नवराते माँ के आ गए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

हाथ में लोटा गंगाजल पानी,

गंगाजल पानी गंगाजल पानी,

मेरी मैया रानी आ गई,

कोई चरण घुलाओ रे,

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

हाथ कटोरी केसर रोली,

केसर रोली केसर रोली,

मेरी मैया रानी आ गई,

कोई तिलक लगाओ रे,

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

चुन चुन कलियाँ हार बनाया,

हार बनाया हार बनाया,

मेरी मैया रानी आ गई,

कोई माला पहनाओ रे,

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

लाल लाल चोला देखो लगी है किनारी,

लगी है किनारी लगी है किनारी,

मेरी मैया रानी आ गई,

कोई चुनर उढ़ाओ रे,

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

हलवा छोले और ले मेवा,

और ले मेवा और ले मेवा,

मेरी मैया रानी आ गई,

कोई भोग लगाओ रे,

नवराते माँ के आ गए,

कोई भवन सजाओ रे………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।