काली कालिका कलकत्ते वाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली कालिका कलकत्ते वाली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे पायल पहनाऊँगी,

बिछुए पहनाके मैया महावर लगाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे लहंगा पहनाऊँगी,

साडी पहनाके मैया चुनरी उढाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे कंगना पहनाऊँगी,

कंगना पहनाके मैया मेहँदी लगाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे हार पहनाऊँगी,

माला पहनाके मैया जनेऊ पहनाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे झुमके पहनाऊँगी,

झुमके पहनाके मैया नथनी लगाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

आजा मैया आजा तोहे बिंदिया पहनाऊँगी,

बिंदिया पहनाके मैया सिंदूर लगाऊँगी,

आजा माँ आजा ना देर लगा ओ काली काली कालिका,

हो मेरे आंगनवा में रंग बरसा काली काली कालिका………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।