छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने

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॥ पावन पाठ ॥

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने...

ठुमक ठुमक अंगना में खेलें मधुर तोतली बोली बोलें,

मैया ने पालना झुला दिए री तीनों देव सती ने,

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने....

मैया के नचत हैं अंगना पांव पनसुरी हाथ में कंगना,

धीरे धीरे चलना सीखा दिए री तीनों देव सती ने,

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने....

आय गईं तीनों की रानी अनुसुइया से बोली वाणी,

पति हमारे छुपाए लिए री तीनों देव सती ने,

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने....

हम हैं बहू तुम्हारी मैया मैया दे दो हमारे सैयां,

अंगना में ला के बैठाए दिए री तीनों देव सती ने,

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने.....

पति अपने पहचान न पाई तीनों देविया देख घबराई ,

मैया ने देव बनाए दिए री तीनों देव सती ने,

छोटे छोटे बालक बना दिए री तीनों देव सती ने.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।