गौरा मेरे साथ चौपड़ खेलो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आओ गौरी मेरे साथ खेलो बाजी दो दो हाथ

आओ गौरी मेरे साथ खेलो बाजी दो दो हाथ,

चाहे सब ले लो या सब दे दो………..

आओ गौरा मेरे संग चौपड़ खेलो,

आओ गौरा मेरे संग चौपड़ खेलो…….

कैसे खेलूँ उसके साथ ,

जो रहता हो खाली हाथ ,

जो भी खेलना है आज नगद खेलो………

आओ भोला मेरे संग चौपड़ खेलो,

आओ भोला मेरे संग चौपड़ खेलो………..

तुम दे देना चांद शीश का मैं दे दूंगी गहना,

हार गए तो भला बुरा मुझको मत स्वामी कहना……….

गौरा जी ने पासा फेंका,

पड़ा पलट कर छक्का,

चांद हार कर चंद्रकांत तो रह गए हक्का बक्का……..

गौरी ऐसे तो ना अकड़ो,

अबकी बार तो पासा पकड़ो,

जीतो दांव जो इस बार मेरा नंदी ले लो…….

आओ गौरा मेरे संग चौपड़ खेलो,

आओ गौरा मेरे संग चौपड़ खेलो……

दूजी बाजी हारे तो भोले बाबा घबराये,

गंगा और कमंडल दोनो ही आगे सरकाये…………

गौरी की तकदीर तेज़ थी जीती ये भी बाज़ी,

मन ही मन मुस्काए देख कर भोले की नाराजी,

बोली अब क्या बचा झमेला,

क्या है पास तुम्हारे धेला,

खेलो बाबा जी नगद तीजा वार झेलो……..

आओ भोला मेरे संग चौपड़ खेलो,

आओ भोला मेरे संग चौपड़ खेलो……..

डमरू और त्रिशूल भी शंकर एक एक कर हारे,

अपनी हालत देख के खुद ही सहम गए बेचारे………….

नागेश्वर ने नाग गले का एक दावँ में हारा,

गौरा अब तो छोड़ के तुमको कुछ भी नहीं हमारा,

तुम हो मेरा आधा अंग,

आओ खेलो मेरे संग,

चाहे सब ले लो या सब दे दो,

आओ गौर मेरे संग चौपड़ खेलो,

आओ गौरा मेरे संग चौपड़ खेलो…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।