बम लहरी हो भोले बम लहरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्ती में झूम रहा है काशी झूम रहे कैलाश वासी,

शिव शंभू अविनाशी तीनो लोक के है प्रहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी……

लक्ष्मी संग डमरू की धुन पर झूम रहे देखो दामोदर,

झूम रही है नदिया सारी झूम रहे है सारे समंदर,

भोले नाथ की भक्ति में देखो झूम रही दुनिया सगरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी………..

सारी दुनिया से बेगानी हुई भोले तेरे नाम की दीवानी हुई,

ना कोई है चिंता ना ही कोई फिकर,

भक्ति में डूबी मस्तानी हुई,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी……..

झूम रही है धरती अम्बर झूम रहे हुई तारे,

वन उपवन भी झूम रहे है झूम रहे सितारे,

वाम देव की देख छवि इक पल को दुनिया ठहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी………

तेरे नाम की है ऐसी लागी लगन डूबी रहू तुझमे ही होके मगन,

तू ही मेरा रहवर तू ही मेरा मालिक तेरे बिना और कही लागे ना ये मन,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी……

काल के कपाल पे मैं लिखती मिटाती हूँ,

भक्त भोलेनाथ की ना भय किसी से खाती हूँ,

रहेगा जो सर पे हाथ मेरे भोलेनाथ का,

ना है कोई परवाह ना ही डर किसी भी बात का,

महाकाल के आगे काल की नजर कभी भी ना ठहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी………..

मस्ती में झूम रहा है काशी झूम रहे कैलाश वासी,

शिव शंभू अविनाशी तीनो लोक के है प्रहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी,

बम लहरी बम लहरी हो भोले बम लहरी………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।