गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत ऊपर रंगों की बरसात हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

होली खेलन को ब्रह्मा जी आए,

ब्रह्माणी की चुनरी लाल लाल हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

होली खेलन को विष्णु जी आए,

लक्ष्मी जी की चुनरी लाल गुलाबी हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

होली खेलन को रामा जी आए,

सीता जी की चुनरी रंग केसरिया हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

होली खेलन को कान्हा जी आए,

राधा जी की चुनरी रंग बिरंगी हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

होली खेलन सारे भक्त भी आए,

चंदन का तिलक राधे कृष्णा हो रही,

गौरा रानी भोले के संग होली खेल रही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।