होली खेलन देखो आयो रे बांके बिहारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली खेलन देखो आयो रे,

आयो बांके बिहारी,

बांके बिहारी मेरो सांवरो बिहारी,

फागण को महीनो आयो रे,

आयो छलियो बिहारी,

आयो बांके बिहारी…….

कुञ्जञ गलिन में शोर मचयो है,

बिच बजारा श्याम खड़ो है,

संग में लोग लुगाई रे,

आयो बांके बिहारी,

फागण को महीनो आयो रे,

आयो छलियो बिहारी,

होली खेलण देखो आयो रे,

आयो बांके बिहारी…….

राधे भी सुनकर दौड़ी दौड़ी आई,

सब सखियन को संग में लाई,

ब्रज में धमाल मचाई रे,

आयो बांके बिहारी,

फागण को महीनो आयो रे,

आयो छलियो बिहारी,

होली खेलण देखो आयो रे,

आयो बांके बिहारी…….

कान्हा ने रंग की भर पिचकारी,

राधा के गोरे तन पर मारी,

सारी चुनरिया भिगोई रे,

आयो बांके बिहारी,

फागण को महीनो आयो रे,

आयो छलियो बिहारी,

होली खेलण देखो आयो रे,

आयो बांके बिहारी…….

राधा ने 'अमन' जो रंग लगाया,

कान्हा ने उसको अंग लगाया,

राधे तो शरमाई रे,

आयो बांके बिहारी,

फागण को महीनो आयो रे,

आयो छलियो बिहारी,

होली खेलण देखो आयो रे,

आयो बांके बिहारी…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।