जिसका आदि ना अंत कोई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जिसका आदि ना अंत कोई,

जिससे है बडा ना संत कोई,

जिसको कहते कैलाशी है,

जिसके चरणों में काशी है,

जीवन उस को सौंप दिया तो ,फिर है क्या मरना,

महाकाल ने थामा हाथ है तो, फिर काल से क्या डरना......

खुश हो जाए जो भोले, तो मन के आस पुराते हैं,

क्रोध जो आ जाए उनको, फिर प्रलय रूप दिखलाते हैं,

छोड़ दिया सब उसके ऊपर, खुद है क्या करना,

महाकाल ने थामा हाथ है तो, फिर काल से क्या डरना.......

डम डम डमरू वाले शंकर, को बस ध्यान लगाना है,

दुनिया के सुख माया छोड़ के, बस भोले को पाना है,

चरणों के नीचे उनके बस, है हरदम रहना,

महाकाल ने थामा हाथ है तो, फिर काल से क्या डरना…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।