मन अंदर मोहन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन अंदर मोहन तन बाहर मोहन,

राधे राधे करता रहूँ जपता रहूँ मोहन,

गैया चराये मेरा मोहन माखन खाये मेरा मोहन,

रास रचाये वो है मोहन खेल खिलाये मेरा मोहन,

राग सुनाये मेरा मोहन बंसी बजाये मेरा मोहन,

सखिया नचाये वो है मोहन दुनिया झुलाये मेरा मोहन,

राधे राधे करते करते हरी को मनाना है,

राधे राधे जपते जपते हरी पास जाना है,

मुझे बस तेरा होना तुझमे मिल जाना है,

तेरा नाम लेते लेते सबको छोड़ जाना है,

राधा गाये मेरा मोहन मीरा गाये मेरा मोहन,

गोपिया गाये वो है मोहन सांसे गाये मेरा मोहन,

प्रेम पढाये मेरा मोहन भक्ति सिखाये मेरा मोहन,

बातें बताये मेरा मोहन सृष्टि चलाये मेरा मोहन……….

मुझे तेरा साथ मिला दुनिया से क्या चाहना है,

तेरे संग प्रीत लागी तू मेरा ठिकाना है,

कृष्णा मेरे कृष्णा,

सबसे प्यारा मेरा मोहन सबसे न्यारा मेरा मोहन,

सबका दुलारा वो है मोहन आँखों का तारा मेरा मोहन,

जबसे मन को मेरे मोहन ने मोह लिया,

तबसे मैंने दुनिया का हर मोह छोड़ दिया,

राधे राधे...

मन अंदर मोहन तन बाहर मोहन,

राधे राधे करता रहूँ जपता रहूँ मोहन…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।