मन होजा दिवाना रे राम जी के चरणों में

सिंगर हरिवंश प्रताप
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मन हो जा दीवाना रे राम जी के चरणों में,

राम चरणों में- राम चरणों में,

मन हो जा दीवाना रे......

राम नाम अमृत का प्याला,

पी करके इसे बन मतवाला,

सारा जीवन बिताना रे राम जी के चरणों में,

मन हो जा दीवाना रे..............

राम नाम सा नाम नहीं है,

अवधपुरी जैसा धाम नहीं है,

प्राणी सुख का खजाना रे राम जी के चरणों में,

मन हो जा दीवाना रे............

प्रेम के भूखे हैं रघुनंदन,

भक्ति के बस में है भवभंजन,

तुम भी भक्ति बढ़ाना रे राम जी के चरणों में,

मन हो जा दीवाना रे.........

लेखक - सिंगर हरिवंश प्रताप

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।