होली खेले चांदनी रात कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने मैं आइये,

बरसाने मैं आइये कान्हा बरसाने मैं आइये…….

कोठे बढ़ के बाट निहारूं तेरे लिए मैं रूप सिंगारू,

खेले ले हाथों में हाथ कान्हा बरसाने मैं आइये,

होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने मैं आइये……..

भर सोने का थाल जिमाऊँ पास बैठ के प्रेम जताऊँ,

कर ल्यूं रज रज के मैं बात कान्हा बरसाने मैं आइये,

होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने मैं आइये……..

कुंज गली मैं फाग मचेगा संग खेलना खूब जचेगा,

सारी सखियाँ होगी साथ कान्हा बरसाने मैं आइये,

होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने मैं आइये……..

कमल सिंह फागण मस्ताना राधा दीवानी श्याम दीवाना,

होगी रंगों की बरसात कान्हा बरसाने मैं आइये,

होली खेले चांदनी रात कान्हा बरसाने मैं आइये……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।