खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फागण मेला आया नशा अलबेला छाया है,

खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है.....

रींगस से खाटू का प्यारे गज़ब नज़ारा होगा,

एमपी यूपी हरयाणा पंजाब भी आया होगा,

हर प्रेमी को श्याम ने जलवा खुद दिखलाया है,

खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है......

उड़े हवा में रंग अबीरा श्याम ध्वजा लहराए,

जगह जगह पर लगे अखाड़े प्रेमी धूम मचाये,

देख रुप मेरे श्याम का चंदा भी शरमाया है,

खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है......

है शौक़ीन मिजाज़ सांवरा बागा है सतरंगी,

एक और है गोपीनाथ जी जोड़ी पर बजरंगी,

तेरह सीढ़ियों पे इसने दरबार सजाया है,

खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है......

फागुन शुक्ला द्वादशी की जग में महिमा न्यारी,

तीन बाण का धारी बना है खाटू लखदातारी,

गौरव ने गौरव श्याम धणी सब तुमसे पाया है,

प्रिया ने भी तो श्याम धणी सब तुमसे पाया है,

खाटू के खाटूश्याम ने खाटू में बुलवाया है.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।