लवकुश ने व्यथा जब सुनाई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

लवकुश ने व्यथा जब सुनाई

रो पड़े राम रघुराई,

रो पड़े भरत लक्ष्मण ,आगई सबको रूलाई

लवकुश ने व्यथा जब सुनाई रो पड़े राम रघुराई…….

दर दर भटके तपोवन,महलो की राज कुमारी,

कुटिया में रहती वाल्मीकिके सीता है मा हमारी,

सीता मैया को बोलो रघुराई किस बात की सजा सुनाई.....

वन भटके लकड़ी बटोरन ,पनिया भरन को जाइ,

चूल्हे के धुंआ के संग ,सिया मैया रोटी बनाई,

कैसे बताऊ, मेरे रघुराई रातरात मैया को नींद न आई….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।