बख्शी जोगिया तु बख्शी मेरेया गुनाहा नु

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॥ पावन पाठ ॥

बख्शी जोगिया तु बख्शी मेरेया गुनाहा नु,

तेरे लेखे लाऊँदा राहां आऊंदे जानदे साहां नु॥

लादे बने जोगिया तु बेड़ी मेरी डोलदी,

कर देवी माफ भुल मेरी अनमोल दी,

बेड़ी बने लाऊंदी, दे ताकत मलाहा नु,

बख्शी जोगिया तु बख्शी मेरेया गुनाहा नु॥

मन सी हंकारी तैनु ऐवे रेहा भुलेया,

ऐवे ही मै झुठियां नियामता ते डुलेया,

राह झड सचा ऐंवे टुर पेया कु राहां नु,

बख्शी जोगिया तु बख्शी मेरेया गुनाहा नु॥

तेरे बिना होर ना सहारा कोई गरीब दा,

बदली सितारा जोगी विक्की दे नसिब दा,

भुले ना कर्म जिदा दर दिया रावां नु,

बख्शी जोगिया तु बख्शी मेरेया गुनाहा नु ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।