आयो फागण मास रंगीलो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आयो फागण मास रंगीलो, क्यों तू देर लगावे है,

मंदिर बाहर आ जावे सांवरे, काहे घबरावे है,

आयो फागण मास रंगीलो......

दूर दूर से सेवक आया,

भाँती भाँती का रंग है ल्याया,

म्हारा हाथ से लगवा ले तन्ने जो रंग भावे है,

मंदिर बाहर आ जावे सांवरे, काहे घबरावे है,

आयो फागण मास रंगीलो......

देख ले प्रेमी ज़िद पे अड़ा है,

चौखट पे तैयार खड़ा है,

आजा छोड़ सिंहासन को, काहे नखरो दिखावे है,

मंदिर बाहर आ जावे सांवरे, काहे घबरावे है,

आयो फागण मास रंगीलो.......

सोच ले फागुन फिर नहीं आसी,

सुन ले इब तो बात ज़रा सी,

शिवम् सुनले अर्ज़ी म्हारी तेरो काई जावे है,

मंदिर बाहर आ जावे सांवरे, काहे घबरावे है,

आयो फागण मास रंगीलो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।