ॐ जय साईनाथ हरे

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॥ पावन पाठ ॥

ॐ जय साई नाथ हरे बाबा जय साई नाथ हरे,

भक्त जनों के संकट भक्त जनों के संकट,

क्षण में दूर करें ॐ जय साई नाथ हरे…..

जो ध्यावे फल पावे दुःख बिन से मन का,

साईं दुःख बिन से मन का,

सुख संपत्ति घर आवे सुख संपत्ति घर आवे,

कष्ट मिटे तन का,

ॐ जय साई नाथ हरे......

मात पिता तुम मेरे शरण पडूँ में किसकी,

साई शरण पडूं में किसकी,

तुम बिन और ना दूजा तुम बिन और ना दूजा,

आस करूँ मैं किसकी,

ॐ जय साई नाथ हरे.......

तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी,

साई तुम अन्तर्यामी,

पार ब्रह्म परमेश्वर पार ब्रह्म परमेश्वर,

तुम सबके स्वामी,

ॐ जय साई नाथ हरे......

तुम करूँणा के सागर तुम पालन करता,

साई तुम पालन करता,

मैं मूरख खलकामी मैं मूरख खलकामी,

कृपा करो बाबा,

ॐ जय साई नाथ हरे.......

तुम हो एक अगोचर सबके प्राण पति,

साई सबके प्राण पति,

किस विधि मिलूँ दयामय किस विधि मिलूँ दयामय,

तुमको मैं कुमति,

ॐ जय साई नाथ हरे.......

दीन बँधु दुःख हरता तुम ठाकुर मेरे,

साईं तुम रक्षक मेरे,

अपने हाथ उठाओ अपने हाथ उठाओ,

द्वार खड़ा तेरे,

ॐ जय साई नाथ हरे.......

विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा,

पाप हरो बाबा,

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,

संतन की सेवा,

ॐ जय साई नाथ हरे,

ॐ जय साई नाथ हरे बाबा जय साई नाथ हरे,

भक्त जनों के संकट भक्त जनों के संकट,

क्षण में दूर करें ॐ जय साई नाथ हरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।