साईं कलयुग के अवतारी हैं

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॥ पावन पाठ ॥

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ.,

साईं कलयुग के अवतारी हैं,

साईं जग के पालनहारे हैं,

साईं ने कर्म जब अपना किया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

जिसने साईं का ध्यान किया,

साईं नाम का अमृतपान उसने पीया,

सब रोग शोक साईं ने हरे,

रहे कष्ट सदा भक्तों से परे,

रहे कष्ट सदा भक्तों से परे,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

हम सारे किस्मत वाले हैं,

श्री साईं के चाहने वाले हैं,

साईं की रहमत हमें मिली,

खुशियों की सभी कलियां है खिली,

जीवन अर्पण चरणों में किया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

भक्ति साईं जी की फलदाई,

जीवन में सुख सारे लाई,

मन की बातें साईं जाने,

अपना सबको साईं माने,

अपना सबको साईं माने......

महिमा साईं की निराली है,

कोई दर से ना लौटा खाली है,

साईं ने खुशियां लौटाई,

मुस्कान लबों पर है आई,

गुलजार चमन सुना है किया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

साईं की सेवा में जो लगा,

उसका है नसीबा पल में जगा,

साईं का दर सबसे प्यारा,

अंधियारों में दे उजियारा,

अंधियारों में दे उजियारा.....

दर साईं के उसकी जीत हुई,

जो भी इस जग से है हारा,

साईं सबका रखवाला है,

साईं ही दीन दयाला है,

लौ साईं से जो लगाई है,

खुशहाली की राहें पाई हैं,

साईं ने सभी पे उपकार किया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

साईं कलयुग के अवतारी हैं,

साईं जग के पालनहारे हैं,

साईं ने कर्म जब अपना किया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

बिन मांगे सब साईं ने दिया,

साईं नाथ, साईं नाथ,

साईं नाथ, साईं नाथ……….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।