असा वेखना है भोले दा बयाह

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज गौरा ते शिव दा बयाह आये शिव दूल्हा बनके,

असा वेखना है भोले दा बयाह आये शिव दूल्हा बनके......

राजा हिमाचल ने नगर सजाये ऐ, नगर सजाये ऐ,

प्रेम नाल सारे रिश्तेदार बुलाये ऐ, रिश्तेदार बुलाये ऐ,

कैसा सुन्दर मंडप सजा के आए शिव दुल्हा बनके,

अज गौरां ते शिव दा ब्याह.....

शिवां जी दे सिर उत्ते चांद सेहरा सजदा, चांद सेहरा सजदा,

हथ विच सर्पां दा कंगना पाया ऐ, कंगना पाया ऐ,

बुढे बैल उत्ते हो के सवार, आए शिव दुल्हा बनके,

अज गौरां ते शिव दा ब्याह.....

दही भल्ले पूरी छोले खीर वी बणाई ऐ, खीर वी बणाई ऐ,

शिवां जी दी खीर विच भंग वी मिलाई ऐ, भंग वी मिलाई ऐ,

नशा प्रेम वाला गया हुंण छा, के आए शिव दुल्हा बनके,

अज गौरां ते शिव दा ब्याह.....

शिव दी बारात वेख मैंना घबराई ऐ, मैंना घबराई ऐ,

सर्पां दी माला शिव गले विच पाई ऐ, गले विच पाई ऐ,

असां होण ना देणा ब्याह, के बोली मैंना राणी तन के,

अज गौरां ते शिव दा ब्याह.....

ब्रह्म विष्णु इंद्र ने मैंना समझाई ऐ, मैंना समझाई ऐ,

ताइयों हिमवान गौरां डोली विच पाई ऐ, डोली विच पाई ऐ,

रहे डम डम डमरू बजा, के आए शिव दुल्हा बनके,

अज गौरां ते शिव दा ब्याह.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।