शिव पार्वती की प्रेम कहानी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

छोड़ महलों का आराम, एक अघोरी संग प्यार किया,

सांसे रुक जाए गम नहीं, हर वक़्त शिव का इंतज़ार किया,

शिव में पार्वती का हिस्सा आधा है, गौरा जिए अकेले ना ये शिव का वादा हैं

ऐसे प्यार की बताओ कहानी कहा,

शिव जैसा राजा कहा, गौरा जैसी रानी कहा......

इनका साथ ही दुनिया को, प्यार करना सिखाता है,

जीना भी सिखाता है, साथी पे मरना सिखाता है,

थाम के भोले का हाथ, पर्वतों पर रहती है,

हवा जहा की इश्क़ पुकारे,शंकर गौरा कहती है,

शिव के ख़ातिर वो कैलाश तक आ गयी, क्या मोहब्बत होती है ये गौरा बता गयी,

ऐसे प्यार की बताओ कहानी कहा,

शिव जैसा राजा कहा, गौरा जैसी रानी कहा…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।