जगदम्बे भवानी मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगदम्बे भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है,

सोहे वेश कसुमल निको,

तेरे रत्नों का सिर पे ताज है,

जगदम्बें भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है.......

जब जब भीड़ पड़ी भक्तन पर,

तब तब आय सहाए करे,

अधम उद्धारण तारण मैया,

युग युग रूप अनेक धरे,

सिद्ध करती भक्तो के काज है,

नाम तेरो गरीब नवाज़ है,

सोहे वेश कसुमल निको,

तेरे रत्नों का सिर पे ताज है,

जगदम्बें भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है......

जल पर थल और थल पर श्रृष्टि,

अद्भुत थारी माया है,

सुर नर मुनि जन ध्यान धरे नित,

पार नहीं कोई पाया है,

थारे हाथों में सेवक की लाज है,

लियो शरणो तिहारो मैया आज है,

सोहे वेश कसुमल निको,

तेरे रत्नों का सिर पे ताज है,

जगदम्बें भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है.....

जरा सामने तो आओ मैया,

छुप छुप छलने में क्या राज़ है,

यूँ छुप ना सकोगी मैया,

मेरी आत्मा की ये आवाज है…….

मैं तुमको बुलाऊं तुम नहीं आओ,

ऐसा कभी ना हो सकता,

बालक अपनी मैया से बिछुड़ कर,

सुख के कभी ना सो सकता,

मेरी नैया पड़ी मजधार है,

अब तू ही तो खेवनहार है,

आजा रो रो पुकारे मेरी आत्मा,

मेरी आत्मा की ये आवाज है......

जगदम्बे भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है,

सोहे वेश कसुमल निको,

तेरे रत्नों का सिर पे ताज है,

जगदम्बें भवानी मैया,

तेरा त्रिभुवन में छाया राज है…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।