भूल भुलेखे जदों साडी याद आवे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भूल भुलेखे जदों साडी याद आवे, सानु याद कर लई

गुफा विच बैठी ये जे दिल घबराए तेरा, ते सानु याद कर लई

अस्सी तेरे बच्चे दस सानु क्यूं बिसरियां,

सुनी ना पुकार साडी, जदों वी पुकारया,

जदों तेरे कन्नां तक साडी वाज़ जाए, सानु याद कर लई माँ

भूल भुलेखे जदों साडी याद आए...

माए तेरे दीद दियां अखियाँ प्यासियां,

कदों तक रैन गियाँ दिलां च उदासियाँ,

एदे कोलों पहेलां मेरी सांस टूट जाये, सानु याद कर लई

भूल भुलेखे जदों साडी याद आए...

जींद जान माए अस्सां तेरे लेखे लई ए,

रानिये नी क्यूं नहीं होंदी साडी सुनवाई ए,

मंदिरां च आके कोई टल खडकाए, सानु याद कर लई

भूल भुलेखे जदों साडी याद आए...

ज़िन्दगी दी बेडी म तेरे ही सहारे माँ,

डोब दे या ला दे ऐनू खुद ही किनारे माँ,

‘चंचल’ दी बेडी जदों हिचकोले खाए, सानु याद कर लई

भूल भुलेखे जदों साडी याद आए...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।