श्याम नजरो में है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम नजरों में है तो सफ़र क्या करूं,

श्याम हैं साथ तो मैं फिकर क्या करूं......

( भवसागर भी पार वो कर ले कृष्ण ने जिसको थामा हो,

उसकी नईया क्या डूबेगी पतवार ही जिसके कान्हा हो॥ )

नाम रुतबा नहीं ना महल चाहिए,

तू जो मिल जाए तो कुछ नहीं चाहिए,

इस जमीं से गगन तक मैं देखू जिधर,

तेरी सूरत मुझे हर कहीं चाहिए,

हाथ तेरा न हो तो मैं सर क्या करूं,

श्याम है साथ तो मैं फिकर क्या करूं.......

कान्हा को सूरत ना देखूं जब मैं सुबह,

हर पल लगता है जैसे कुछ बाकी है,

दुनिया वाले चाहे जो कुछ भी दे दें,

मुरली वाले का बस साथ ही काफ़ी है.....

मैं ही मीरा बनूं मैं ही राधा बनूं,

खुद का मैं कम मगर तेरा ज्यादा बनूं,

महिमा तेरी जो निस दिन सुनाता रहे,

कुछ न बन पाऊं तो मैं वो गाथा बनूं,

जब हृदय में है तू तो मैं घर क्या करूं,

श्याम हैं साथ तो मैं फिकर क्या करूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।