सालासर धाम की है ऐसी हस्ती

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दया दिन रात यहाँ बरसती,

सालासर धाम की है ऐसी हस्ती,

धाम बाला जी का है यह प्यारा,

आने को दुनिया है तरसती,

सालासर धाम की है ऐसी हस्ती,

दया दिन रात यहाँ बरसती.....

धाम जग में यह अति निराला,

बसते है जहाँ बजरंगी बाला,

श्रद्धालु भक्तजन सब आते,

बड़े प्रेम से भजन सब गाते,

भक्ति की छाती ऐसी मस्ती,

सालासर धाम की है ऐसी हस्ती,

दया दिन रात यहाँ बरसती.....

आकर चरणों में जो शीश नवाते,

बाला जी की वो कृपा सब पाते,

मिटती उनकी व्याधि रोग विकार,

बजरंगी करते सबके सपने साकार,

हनुमान जी की कण कण अस्ति,

सालासर धाम की है ऐसी हस्ती,

दया दिन रात यहाँ बरसती.....

भव सागर में जिनकी डोले नैया,

बनते बजरंगी उनके खिवैया,

थाम रखते सदा हाथों पतवार,

लगाते उनका सदा बेड़ा पार,

भंवर पड़े पर डूबे ना कश्ती,

सालासर धाम की है ऐसी हस्ती,

राजीव दया दिन रात है यहाँ बरसती.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।