खाटू श्याम बाबाजी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन के भीतर एक नाम की जाप्ता हूँ मैं माला जी,

मन के भीतर एक नाम की जाप्ता हूँ मैं माला जी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी…..

परम थे ज्ञानी उनकी कहानी सुनलो मेरी जुबानी जी,

परम थे ज्ञानी उनकी कहानी सुनलो मेरी जुबानी जी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी……..

तीन बांड के तुम धनि थे,

तुमसा नहीं था बलसाली,

स्वयं हरी भी थे घबराये,

देखकर प्रदर्शन भार,

तीन बांड के तुम धनि थे,

तुमसा नहीं था बलसाली,

स्वयं हरी भी थे घबराये,

देखकर प्रदर्शन भार,

जो माँ अहिल्या को दिए वचन से,

आन पड़ी विपदा भारी,

धर्म की खातिर कुरुक्षेत्र में,

शीस की भेट चढ़ा डाली,

जिसके नाम में स्वयं हरी है,

जिसका हैं बोल बाला जी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी.......

खाटू धाम में बसने वाले,

तुमसा नहीं कोई प्यारा,

हारे हुवे के संग तुम रहते,

दीन हीन का हो सहारा,

खाटू धाम में बसने वाले,

तुमसा नहीं कोई प्यारा,

हारे हुवे के संग तुम रहते,

दीन हीन का हो सहारा,

श्रद्धा भाव से जो तुम्हें पूजे,

तन मन से करे जैकारा,

मनो कामना पूर्ण हो करते,

मिलता दुखो से छुटकारा,

कीर्ति जिसकी अम्बर गए,

कण कण में जो बस्ता जी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी,

खाटू श्याम खाटू श्याम बाबाजी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।