इस सांवरिया के प्यार में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इस सांवरिया के प्यार में कही पागल ना हो जाऊँ……..

काली रात देवकी नै जायो काली रात फेर गोकुल आयो,

उस काली रात नै देख के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस सांवरिया के प्यार में कही पागल ना हो जाऊँ……..

काली नाग नाथ के लायो काली नाग पे वो खेल रचायो,

उस काली नाग नै देख के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस सांवरिया के प्यार में कही पागल ना हो जाऊँ……..

वो काला उसकी गऊये काली नन्द की सारी बंसी काली,

उसकी बांसुरी की धुन नै सुन के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस सांवरिया के प्यार में कही पागल ना हो जाऊँ……..

नरसी जी का भात भराया भात भरावन सिरसा आया,

मैं उसके प्यार के कही पागल ना हो जाऊँ,

इस सांवरिया के प्यार में कही पागल ना हो जाऊँ……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।