शिव नाम केवल सार है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

निसार इस संसार में शिव नाम केवल सार है,

शिव शक्ति है शिव भक्ति है शिव मुक्ति का आधार है,

शिव पार्थना शिव साधना शिव ध्यान मंग्लाकार है,

शिव अनादि शिव अनंत है इस पार शिव उस पार है,

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर हर भोले नमः शिवाय.....

जय शिव शंकर जय गंगाधर करुणाकर करतार हरे,

जय अविनाशी जय कैलाशी सुखराशी सुखमार हरे,

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर हर भोले नमः शिवाय.....

जय शशि शेखर जय डमरूधर जय जय प्रेमागर हरे,

जय त्रिपुरारी जय मदहारी अमित अनंत अपार हरे,

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर हर भोले नमः शिवाय......

निगरुण जय जय सगुण अनामय निराकार साकार हरे,

पार्वती पति हर हर शम्भो पाहि पाहि दातारी हरे,

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर हर भोले नमः शिवाय.....

नीलकंठ जय भूतनाथ जय मृत्यूनंजय अविकार हरे,

पार्वती पति हर हर शम्भो पाहि पाहि दातारी हरे,

नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय हर हर भोले नमः शिवाय......

जय जय शम्भु जय शिव शम्भु जय जय शम्भु जय शिव शम्भु,

जय जय शम्भु जय शिव शम्भु जय जय शम्भु जय शिव शम्भु,

जय महेश जय जय भवेश जय आदिदेव महादेव विभो,

किस मुख से है गुणगीत प्रभु तव अपार गुण वर्णन हो,

जय जय शम्भु जय शिव शम्भु जय जय शम्भु जय शिव शम्भु....

जय भावकारक तारक हारक पातक दातक शिव शम्भो,

दीन दुःखहर सर्व सुखकर प्रेम सुधाधर की जय हो,

जय जय शम्भु जय शिव शम्भु जय जय शम्भु जय शिव शम्भु.....

पार लगा दो भवसागर से वन कर कर्णधार हरे,

पार्वती पति हर हर शम्भो पाहि पाहि दातारी हरे,

जय जय शम्भु जय शिव शम्भु जय जय शम्भु जय शिव शम्भु.....

करपूर गौरम करूणावतारम,

संसार सारम भुजगेन्द्र हारम,

सदा वसंतम हृदयारविंदे,

भवम भवानी सहितं नमामि,

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,

त्वमेव बंधू च सखा त्वमेव,

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,

त्वमेव सर्वं मम देव देव………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।