थारी नगरी में भगतां फाग मचायो रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

थारी नगरी में सांवरिया भगतां फाग मचायो रे,

थारी नगरी में......

अबीर गुलाल की भर भर झोली, रोली भाल लगाई जी,

ईसो फाग तो मैं भी खेलूं जी ललचायो रे,

थारी नगरी में......

अनमोलो चोलो केसरियो फेट्यो बंध्यो कसुतो जी,

आज बतादे तन्ने कन्हैया कुण सजायो रे,

थारी नगरी में......

सीधो सीधो सभा मंड से बेगो बाहर आजा रे,

भीतर बड़के बैठ्यो म्हाने दाए ना आयो रे,

थारी नगरी में......

थारे आया ही अलबेला रंग सुरंगो जमसी जी,

श्याम बहादुर शिव मस्ती को प्यालो प्यायो रे,

थारी नगरी में........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।