नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी याद में श्याम धणी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी बात में श्याम धणी,

आज संवारा थारी याद में हिचकी आवे बहुत धणी,

झर झर आंसू पड़े आँख सु जो झरने से नीर बहे,

एक एक आंसूडा माहरे अंतर मन की बयथा कहे,

इन आंसूडा के कारन ही सब भगता की बात बने,

नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी.......

सूरत प्यारी प्यारी थारी हिवडे विच समाई जी,

दर्शन देके आस पुगा दो करदो मन की चाही जी,

बात बनी जी महरी संवारा करदो थारी सवामणि,

नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी......

अखिया हो गई लाल बात में अब तो दया दिखाओ जी,

तर्सनो छोड़ो सांवरिया नीले चडके आओ जी

दर्शन दे म्हारो मन हरसा दो महाभारत का वीर,

नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी.........

सुन पुकार अब अपने भगता दी सांवरिया झट आवे है,

करुना सिन्धु भगता पे अपनी करुना बरसावे है,

मात्र तत श्याम सुंदर की महिमा न जाये वरनी,

नैन निगोड़ा दू:खन लाग्या थारी.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।