मेरी गौरा मईया भोले से रूठी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी गौरा मईया री भोले से रूठी,

मैं बिलकुल ना घोटूं ये तेरी बूटी……

जरा धीरे धीरे बोल विष्णु जी सुन लेगे,

जरा होल होल बोले वो लक्ष्मी सुन लेगी,

ये बूटी है गौरा मेरी दिव्य बूटी,

मेरी गौरा मईया री भोले से रूठी……..

जरा धीरे धीरे बोल ब्रह्मा जी सुन लेगे,

जरा होल होल बोले वो ब्राह्मणी सुन लेगी,

ये मस्ती तो गौरा बड़ी पीछे छुटी,

मेरी गौरा मईया री भोले से रूठी……..

जरा धीरे धीरे बोल वो नारद जी सुन लेगे,

जरा होल होल बोले शारदे सुन लेगी,

जो धाम मेरे पे देते है डयूटी,

मेरी गौरा मईया री भोले से रूठी……..

जरा धीरे धीरे बोल वो भक्त सुन लेगे,

जरा होल होल बोले पीने लग जायेगे,

ये मस्ती भक्तों ने गंगा पे लुटी,

मेरी गौरा मईया री भोले से रूठी……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।