गौरा जी को लेने आए भोलेनाथ जी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सजे है अंबर साजी है धरती,

सजी पुरी आकाश जी,

गौरा जी को लेने आए,

मेरे भोलेनाथ जी.....

घुंघट में चंदा सी लगे मेरी मैया पार्वती,

मन मोहक सा रूप है लगे मेरे भोलेनाथ की,

घुंघट में चंदा सी लगे मेरी मैया पार्वती,

मन मोहक सा रूप लगे मेरे भोलेनाथ की,

मिलन की मंगल घड़ी है आई शक्ति शिव के साथ जी,

गौरा जी को लेने आये मेरे भोलेनाथ जी......

सजे है काशी सजी उज्जैनी,

सजी पुरी कैलाश जी,

गौरा जी को लेने आए मेरे भोलेनाथ जी.....

थामा हाथ मा गौरा का मेरे भोलेनाथ ने,

बचन दिया है साथ रहेंगे हर मुश्किल हालत में,

थामा हाथ मा गौरा का मेरे भोलेनाथ ने,

बचन दिया है साथ रहेंगे हर मुश्किल हालत में,

मिलन की मंगल घड़ी है आई शक्ति शिव के साथ जी,

गौरा जी को लेने आए मेरे भोलेनाथ जी.....

सजी हिमाचल सजी हिमालय,

सजी पुरी बरात जी,

गौरा जी को लेने आए मेरे भोलेनाथ जी......

सात फिरो से आज बनेगी पार्वती भोलेनाथ की,

पुष्प की वर्षा देव करे है नमन करे हर बार जी,

सात फिरो से आज बनेगी पार्वती भोलेनाथ की,

पुष्प की वर्षा देव करे है नमन करे हर बार जी,

मिलन की मंगल घड़ी है आई शक्ति शिव के साथ जी,

गौरा जी को लेने आए मेरे भोलेनाथ जी…..

सजे है अंबर साजी है धरती,

सजी पुरी आकाश जी,

गौरा जी को लेने आए,

मेरे भोलेनाथ जी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।