साईं तेरे दर पे

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॥ पावन पाठ ॥

छोड़ कर साथ दुनिया का,

तेरे दर पे जब से आया,

जो भी क़िस्मत ने छीना था,

तेरे चरणों में सब पाया,

हमेशा यूं ही बनाए रखना,

अपना हाथ मेरे सर पे,

साईं तेरे दर पे,

साईं तेरे दर पे,

ख़ुद मैंने पाया,

साईं तेरे दर पे,

सारे गम भुलाया,

साईं तेरे दर पे…..

दिल मेरा हर बार ये गाए,

चल उस राह जो शिरडी जाए,

प्यार के बिन सुनसान है दिल,

मन खुशियों के बिन खाली है,

मेरे जैसे दर पे आए जाने कितने सवाली हैं,

तू सबको चरणों में रख ले बाबा,

अपने प्यार से तर कर दे,

साईं तेरे दर पे,

साईं तेरे दर पे,

ख़ुद मैंने पाया,

साईं तेरे दर पे,

सारे गम भुलाया,

साईं तेरे दर पे…..

मैंने जब से होश संभाला,

साईं मेरा तू रखवाला,

तेरी ही दरबार में बाबा सारी उम्र बिताऊं मैं,

जी करता है सबसे सच्चा भक्त तेरा कहलाऊं मैं,

नजारें तू अपने मंदिर के,

आंखों में मेरे भर दे,

साईं तेरे दर पे,

साईं तेरे दर पे,

ख़ुद मैंने पाया,

साईं तेरे दर पे,

सारे गम भुलाया,

साईं तेरे दर पे……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।