भोले अपना दास बनाके राख ले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सूलफे कि गांठ बाबा,

आँख राखै लाल यो,

काला काला माल,

गणा प्यारा लागै सै.....

जब लागज्या सै दो धम बाबा जी,

यो शहर मैंने फेर तो सबत न्यारा लागै सै,

इन पहाड़ा की आबादी बाबा लेव सै आजादी,

मैंने कुछ दिन अपणे तू पास राखले,

इस दुनिया तै बरग्या मन भोले नाथ ,

मैंने अपणा बणाकै न तू दास राखले....

तेरे लाडा का सू बूखा मेतो गणा भोले नाथ,

जिसत लगाया दिल वा भी छोड गई साथ,

इस चिलम के धम पै यो जिणा सीख लिया,

भोले आण क न मेरा इब पकड़ ले हाथ,

सुण नन्दी की तरहा भोले मैंने भी तू ,

अपणा इब तो बणा क खास राखले….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।