शिव अनेक में शिव एक है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव मुझमे है शिव तुम में है,

शिव अनेक में शिव एक है....

हर कण कण का मन है शिव से रौशन,

बोल बम बम मिलेंगे शिव के दर्शन,

बन जाऊं भस्म शिव मुझको ओढ़ ले,

मिल जाए अगर शिव जीवन भी छोड़ दे,

शिव राख में, शिव आग है,

शिव अनेक में शिव एक है......

शिव ही में धरती शिव ही में गगन समाये,

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,

शिव ही दिन, शिव ही रात सजाये,

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,

शिव ही से मुक्ति, शिव ही से जीवन पाए,

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,

शिव ही गंगा, शिव ही प्यास जगाये,

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,

शिव ही अमृत शिव ही विष पिलाये,

शिव प्राण है, शिव काल है,

ओमकार है, महाकाल है,

शिव मुझ में है, श्वी तुम में है,

शिव अनेक में, शिव एक है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।