भोलेनाथ कितने भोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

नाथ मेरे जाना यही,

मेरी तो औकात नहीं,

दिन भी नहीं रात नहीं,

जिस से मुलाकात करू,

तेरी ही बात करूं,

रहना चाहु मैं अकेला,

ताकि तेरा ध्यान करूं,

नशा नहीं पर दुआ है,

नाथ मुझ को क्या हुआ है,

जिंदगी में कितनी कमीया,

सबसे मन ये उठ चुका है,

नाथ तेरा केसा जादू,

लगे की सब तो मिल चुका है......

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

कलिकाल

आने वाला बीत चूका,

अच्छा बुरा साल तू,

देवो का देव महादेव महाकाल तू,

जो तुझसे दूर स्वामी,

जी रहा वो फालतू,

ओ जगत को मिटने वाले,

तुम्हें क्या जरूरत है,

गांजे या भांग की,

माला तुम तो जपो,

माला राम नाम की,

बच्चे हम अनादि नाथ,

कुछ नहीं जानते,

खुद के लिए पिए गांजा,

आपके ही नाम पे,

आप कितने भोलेनाथ,

बुरा भी ना मानते,

जगता जपू,

सोता जपू,

नाथ तेरा नाम देदे,

नाथ में रे,

थाम मुझे,

रूह को आराम देदे,

तू नहीं है नाथ सिर्फ सारे मंदिरो में,

सबमें तू छिपा हुआ है दिल में धड़कने में,

आत्मा का तू खुदा है,

दुनिया क्यों ये जाने नहीं,

तुझको नहीं तुझमें नशा,

बावरे पहचानने नहीं,

इतनी सी है बस कहानी,

हम है मछली,

तू है पानी....

दाता तेरी भक्ति देदे .....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।