मेला भोले का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

डम डम, डम डम डमरु बाजे,

डम डम, बाजे डमरु xll-ll

हो मेला भोले का,,, जय हो ll, लगे नीलकंठ द्वार,

हो कावड़िया बोल रहे,,, जय हो ll, जैकार,

हो मेला भोले का,,, जय हो ll, लगे नीलकंठ द्वार,

हो कावड़िया बोल रहे,,, जय हो ll, जैकार,

हो मेला भोले का xll,,,,,

डम डम, डम डम डमरु बाजे,

डम डम, बाजे डमरु xll-ll

हो जग का मालिक, भोला बाबा, रहता मस्त मलंग है ll

शिव के नाम का, मुझको भी यह, चढ़ गया देखो रंग है l

हो सोए भाग, जगा के मेरे ll, करदे बेडा पार,

हो मेला भोले का,,, जय हो ll, लगे नीलकंठ द्वार,,,,,,,F

तन पे भबूती, सोहे माथे, पे सोहणा सा चंदा ll

जटा बीच, गंग बहती सोहनी, गल में नाग भुजंगा l

हो तेरा रूप, बड़ा सोहना लगता ll, हम हो गए बलिहार,

हो मेला भोले का,,, जय हो ll, लगे नीलकंठ द्वार,,,,,,,F

कमल पूरी को, शिव के नाम का, हो गया आज सरूर ll

अपनी दया का, मेरे सर पे, रख दो हाथ जरूर l

हो दर्शन दे दो, भक्तों को ll, यह कहता राम अवतार,

हो मेला भोले का,,, जय हो ll, लगे नीलकंठ द्वार,,,,,,,F

अपलोडर अनिलरामूर्तिभोपाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।