कैसे तुम्हें रिझाऊं इतना जरा जरा बता दे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन कृष्ण भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

कैसे तुम्हे रिझाऊ इतना जरा बता दे,

कैसे तुम्हे रिझाऊ....

सिंदूर तन पै मलकर हनुमान ने रिझाया,

मैं क्या लगाऊं तन पर इतना जरा बता दे,

कैसे तुम्हे रिझाऊ....

घुंघरू पहन के मीरा मधुबन में ऐसे नाचे,

मैं भी खुशी से नाचू कोई ताल जरा बता दें,

कैसे तुम्हे रिझाऊ....

मैंने सुना है तुमने अर्जुन को भी है तारा,

ऐसे हमें भी तारो इतना जरा बता दे,

कैसे तुम्हे रिझाऊ....

मैंने सुना है तुमने भक्तों को भी है तारा,

ऐसे हमें भी तारो इतना जरा बता दो,

कैसे तुम्हे रिझाऊ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।