भजन की नहीं विचारी रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भजन की नहीं विचारी रे महरा मनवा नहीं विचारी रे,

थारी म्हारी करते बीती उमर सारी रे......

नो दस मास गरभ मे राख्यों माता थारी रे,

जल्दी बाहर निकालो प्रभु जी, फेरु माला थारी रे,

भजन की नहीं विचारी रे...........

बालपना मे लाड़ लड़ायो माता थारी रे,

आई जवानी प्यारी लागे, घर की नारी रे,

भजन की नहीं विचारी रे........

आयो बूढ़ापो हासी हासे घर की नारी रे,

अबे यो बूढ़ो कदे मरेगों, छूटे जान हमारी रे,

भजन की नहीं विचारी रे..........

अंत समय मे दस दरवाजा पड़ गई झाली रे,

कालूदास गुरु की शरणा, आवो सारि रे,

भजन की नहीं विचारी रे..............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।