ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले के आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आ जाओ आ जाओ ओ आ जाओ,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले के आजा,

मैने आस की जोत जगाई ,

मेरे नैनो मे माँ है समाई,

मेरे सपने सच तू बना जा,

मेरी माँ को ले के आजा आजा तू आजा,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले जे आजा...

हर पल माँ के सघं विरोजो,

धन्य तुम्हारी भक्ती है,

शक्ती का तुम बोझ उठाते,

गज़ब तुम्हारी शक्ती है,

तेरे सुन्दर नैन कटीले हो रंग के पीले पीले,

मेरी माँ मुझ से मिला जा आजा अाजा,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले के आजा....

पवन रुपी माँ के प्यारे चाल पवन की आ जाओ,

देवो की आँखो के तारे आओ कर्म कमां जाओ,

आ गहनो को तुम्हे पहनांऊ ,

बाँहो मै घघंरु पहनांऊ,

मै बजांऊ ढोल ओर बाजा,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले के आजा....

पा के सन्मुख भोली माँ को दिल की बाते कर लु मै,

प्यास बुझा लु जन्मो की और खाली झोली भर लु मै,

माँ के चरणो धूल लगा लू ,

मै सोया नसीब जगा लु ,

मेरे दुख सन्तांप मिटा जा,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले के आजा....

माँ कहेगी बेटा मुझको मै माँ कह के बुलाऊगा,

ममता रुपी वरदायनी से वर मुक्ती का पाऊंगा,

सारी दुनिया से जो न्यारी ,

छवि सुन्दर अतुल प्यारी ,

उस माँ के दर्श दिखा जा आजा,

ओ जगंल के राजा मेरी मैया को ले जे आजा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।