लावा मैं तां लैणीआं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले दिलां दे भेद बतायो लावा मैं तां लैणीआं....

पहलिआ लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले गंगा जो हरीदवार छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

दूजिआ लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले चंदा नु चांद लोक छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

तीजीआ लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले नागां नु नाग लोक छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

चौथिआ लावा लई गौरा ने फेर पावाड़ा पाया,

भोले डमरू नु मदारी कोल छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

पंजमिआं लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले चिमटा संतां कोल छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

छेमिआं लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले नंदी जो जंगलां च छोडयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

सतमिआ लावा लई गौरा ने फेर पवाड़ा पाया,

भोले दिलां दे सारे भेद खोलयो,

लावा मैं तां लैणीआं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।