नर्मदे हर हर कहो एक बार

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॥ पावन पाठ ॥

नर्मदे हर हर कहो एक बार....

नर्मदे हर हर कहो एक बार, हो जायेगा, भव-सागर पार,

माँ भक्ति की शक्ति देती, पाप कर्म से मुक्ति देती,

करती है उद्धार, करती है उद्धार,

नर्मदे हर हर...

जिसने भी पाया है, मां का सच्चा दर्शन,

काम, क्रोध, मद, लोभ गया, शुद्ध हो गया मन,

शुद्ध हो गया मन, तो समझो, मिल गया जीवन सार

नर्मदे हर हर...

हे सनातनी माँ रेवा, तेरी धारा है पावन,

तेरे तट पर रहूँ सदा, मैं गाऊँ तेरे भजन,

गाऊँ तेरे भजन, तू कर दे, इतना ही उपकार,

नर्मदे हर हर...

माँ तेरी आराधना, पूजन और अर्चन,

तेरा सुमिरन रहे सदा, अर्पित हैं श्रद्धा सुमन,

अर्पित हैं श्रद्धा सुमन, करो माँ निजवंदन स्वीकार,

नर्मदे हर हर...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।