महाकाल की नगरी में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महाकाल की नगरी में, महाकाल की नगरी में,

आया तेरा दीवाना...

मुझे अपनी शरण रख लो, महाकाल शरण रख लो,

दिल कहता है दीवाना...

महाकाल की नगरी में .........

हर पल मेरी किस्मत में दर्शन हो इसी दर के,

छूटा है ना छूटेगा तेरे दर पे आना जाना,

मैं हु तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना

मैं हु तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना.....

( शेर- दर्द सह कर भी, तेरा नाम लिए जाते है,

तेरे दीवाने तुझे याद किए जाते है,

तुम दर्शन दो ना दो दर्शन तेरी इच्छा भोले,

हम तो हर पल तेरी चौखट पे चले आते है॥ )

बस इतनी कृपा करना बाबा मेरे शिव शंकर,

जब जान मेरी निकले तुम सामने आजाना,

मैं हु तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना....

( शेर - मेरे मन में भोलेनाथ, तेरा नाम चल रहा हो,

मेरे सामने हो तुम ओर मेरा दम निकल रहा हो॥ )

दुख दर्द के मारो से, मेरा एक मशवरा है,

ये दीवानों की नगरी है, एक बार चले आना,

मैं हु तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना....

( शेर - आओ दिखाऊं कैसी, ये उज्जैन नगरी है,

जहा पर रात दिन बाबा तेरी कृपा बरसती है॥ )

( शेर- मुझे बाबा ये बता दो, वो नजर कोन सी हैं,

जिसे पाकर सारी दुनिया, तेरे दर पे झूमती हैं॥ )

मैं हु तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।