प्रभु कैसा खेल रचाया है पर मेरी समझ नहीं आया है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है.....

पृथ्वी नीचे पाताल बनाया,

ये मिट्टी कहां से लाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है.......

भांति भांति के पेड़ बनाए,

ये बीज कहां से लाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है.......

तूने रंग बिरंगे फूल खिलाए,

यह रंग कहां से लाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है......

कितने तरह के पशु पक्षी बनाए,

ये आवाज कहां से लाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है….

तूने अलग-अलग मनुष्य बनाए,

ये सांचा कहां से लाया है,

और कैसे ये खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है,

प्रभु कैसा खेल रचाया है,

पर मेरी समझ नहीं आया है…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।